प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल में एकाग्रता से आत्मबल तक… ‘मेधा योग स्तर-2’ से निखर रही विद्यार्थियों की अंतर्निहित क्षमता



 आगरा। विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक सजगता, भावनात्मक संतुलन एवं एकाग्रता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल में आर्ट ऑफ लिविंग के सहयोग से तीन दिवसीय ‘मेधा योग स्तर-2’ कार्यक्रम का आयोजन 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक किया जा रहा है। विशेष रूप से कक्षा नौ के विद्यार्थियों के लिए आयोजित यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश में इस स्तर पर आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रमों में से एक है। इसके लिए छात्रों से किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया गया है।

कार्यक्रम के प्रथम दिवस विद्यार्थियों को ध्यान, सुदर्शन क्रिया, प्राणायाम एवं मुद्रा अभ्यास के माध्यम से मन की शांति, एकाग्रता तथा शरीर और मन के बीच बेहतर समन्वय का अनुभव कराया गया। विद्यार्थियों को 108 बार सूर्य नमस्कार के महत्व एवं उससे जुड़े शारीरिक - मानसिक लाभों से भी परिचित कराया गया।

कार्यक्रम को रोचक एवं सहभागितापूर्ण बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों एवं खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों की एकाग्रता, सजगता, त्वरित प्रतिक्रिया एवं आत्म-जागरूकता विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। विद्यार्थियों ने ‘मुद्रा प्राणायाम’ का अभ्यास भी किया, जिसका उद्देश्य मानसिक सक्रियता एवं एकाग्रता को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही सत्संग के माध्यम से विद्यार्थियों को सकारात्मक चिंतन, आत्म-अनुशासन एवं जीवन-मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया।

इस विशेष तीन दिवसीय कार्यक्रम का मार्गदर्शन आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम के वरिष्ठ संकाय सदस्य श्री प्रदीप पाठक एवं डॉ. संगीता झा द्वारा किया जा रहा है। विद्यालय में स्थानीय संकाय सदस्य श्रीमती रुचिरा ढल तथा स्वयंसेवक मोना आसवानी कार्यक्रम के सुचारु एवं सफल संचालन में सहयोग प्रदान कर रही हैं।

विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे संतुलित व्यक्तित्व का निर्माण करना है, जो शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सजग, भावनात्मक रूप से सुदृढ़ और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण से परिपूर्ण हो। ‘मेधा योग स्तर-2’ इसी समग्र शिक्षा-दृष्टि को व्यवहार में उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

विद्यालय निदेशक डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि विद्यार्थियों के भीतर छिपी क्षमताओं को पहचानना और उन्हें सही दिशा में विकसित करना शिक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। योग, ध्यान और जीवन-कौशल आधारित ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को स्वयं से जुड़ने, अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने तथा जीवन की चुनौतियों का संतुलित ढंग से सामना करने में सहायक सिद्ध होते हैं।



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