निर्मल सेवा सदन में 'वंडरफुल जैनिज़्म 7' का भव्य शुभारंभ
गूगल बाबा मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज के सानिध्य में युवाओं ने समझी जैन धर्म की गूढ़ता
आगरा। निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला, आगरा में आयोजित जैन धर्म पर आधारित शानदार सत्र 'वंडरफुल जैनिज़्म 7' (Wonderful Jainism 7) आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य युवा सोच को प्रेरित करना और जैन दर्शन, मूल्यों, आध्यात्मिकता तथा आत्म-विकास के मार्ग की गहरी समझ प्रदान करना है।
आज संत चर्या शिरोमणी पट्टाचार्य आचार्य भगवन "श्री 108 विशुद्ध सागर जी" महामुनिराज जी के तीन अनमोल रत्न, परम् प्रभावक सुयोग्य शिष्य, जगत विख्यात "गूगल बाबा" श्रमण मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज जी, श्रमण मुनि श्री 108 शील सागर महाराज जी एवं श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभात सागर महाराज जी ससंघ के पावन सानिध्य में यह आयोजन संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री महावीर प्रसाद जैन, सुराजो देवी जैन एवं राजीव कुमार जैन परिवार द्वारा मुनि श्री का पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त करने के साथ हुआ। ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता से भरपूर यह सत्र इतना प्रभावशाली था कि पूरा सभागार आगरा के युवाओं एवं श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था। युवाओं ने एक स्वर में उद्घोष किया — “Proud to be a Jain!”
'द डीप डाइव मेथड' और एआई (AI) का रोचक उदाहरण
संयुक्त धर्म सभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में कहा कि जिस प्रकार एआई (AI) में ऊपर-ऊपर पूछने पर सीमित जानकारी मिलती है, लेकिन 'द डीप डाइव' (Deep Dive) करने पर गूढ़ रहस्य व सटीक तथ्य सामने आते हैं, ठीक उसी प्रकार जैन धर्म के सिद्धांतों को भी गहराई में उतरकर समझने की आवश्यकता है।
> "जो समय की कीमत करना जानते हैं, उनका वक्त बदलते देर नहीं लगती। ऊपर तैरने में वह मज़ा नहीं जो समुद्र और नदी की गहराइयों में उतरने में है। आज हम 'द डीप डाइव मेथड' से जैन धर्म के गूढ़ रहस्यों और उसकी असल सच्चाई तक पहुँचेंगे।"
> — मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दैनिक जीवन के नियम
मुनि श्री ने दैनिक जीवन में पालन किए जाने वाले जैन नियमों—जैसे रात्रि भोजन त्याग, पानी छानकर पीना, घर का भोजन करना आदि—के पीछे के व्यावहारिक और वैज्ञानिक कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने गेहूँ से दलिया, आटा, बाटी और मैदा बनने की प्रक्रिया का सुंदर उदाहरण देते हुए समझाया कि प्रक्रिया बदलने से स्वाद और प्रभाव में कितना बड़ा अंतर आ जाता है। इस सत्र के माध्यम से युवाओं को उन प्रश्नों के उत्तर मिले जो वे अक्सर अपने दैनिक जीवन में महसूस करते हैं।
कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन विजय शास्त्री द्वारा किया गया।
उपस्थिति एवं गरिमामयी सहभागिता
इस अवसर पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के मनोज जैन, रमेश जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती), आनंद जैन, शैलेश जैन (लाला जी), मुकेश जैन, रमेश जैन, आशीष जैन, विवेक जैन, चक्रेश जैन, सतेंद्र जैन (साहुल), आशीष जैन (बाबा), राजीव जैन, सचिन जैन (तार), आशु (वी.के), रोहित जैन, नितिन, सनी, अनिकेत, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित समस्त मंडल एवं सकल जैन समाज उपस्थित रहा।


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