किसानों के संघर्ष को मिली बड़ी सफलता, गलत चक सीमांकन निरस्त; शेष समस्याओं के समाधान का एक सप्ताह में आश्वासन
बाँदा। जनपद बाँदा के अमलीकौर, त्रिवेणी, खपटिहा खुर्द, लोहरा सहित विभिन्न गांवों के किसानों की चकबंदी, गलत सीमांकन एवं अन्य जनसमस्याओं को लेकर चल रहे लंबे संघर्ष को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। किसानों द्वारा 16 जून 2026 से बाँदा के अशोक लाट तिराहे पर क्रमिक एवं आमरण अनशन शुरू किया गया था। इसके बाद 14 एवं 15 जुलाई को लखनऊ स्थित जवाहर भवन में दो दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित कर किसानों ने अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया।
किसानों के लगातार संघर्ष, जनदबाव और प्रशासन के साथ हुई वार्ताओं के परिणामस्वरूप 17 जुलाई 2026 को गलत चक सीमांकन को निरस्त कर दिया गया, जिससे क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत मिली। हालांकि चकबंदी विभाग से जुड़ी कुछ अन्य समस्याएँ अभी भी लंबित थीं।
इन्हीं शेष मांगों के समाधान को लेकर 20 जुलाई 2026 को लखनऊ स्थित इंदिरा भवन में पीसीएस अधिकारी एवं उपसंचालक चकबंदी श्री संत कुमार से मुलाकात कर किसानों की समस्याओं से अवगत कराया गया। इस दौरान श्री संत कुमार ने आश्वासन दिया कि चकबंदी विभाग से संबंधित सभी शेष समस्याओं का समाधान भी एक सप्ताह के भीतर कर दिया जाएगा।
इस अवसर पर कहा गया कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और विभाग द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुरूप शीघ्र कार्रवाई होने की उम्मीद है। यह सफलता उन सभी किसानों की एकजुटता, धैर्य और लोकतांत्रिक तरीके से किए गए संघर्ष का परिणाम है, जिन्होंने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार आवाज उठाई।
संघर्ष का नेतृत्व कर रही प्रतिनिधि ने सभी किसान भाइयों-बहनों को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद देते हुए कहा कि किसानों के अधिकारों और न्याय के लिए भविष्य में भी संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
संवाददाता: धर्मेंद्र ठाकुर की रिपोर्ट बाँदा...

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