मिशन शक्ति का ढिंढोरा — बांदा में महिलाओं को फर्जी मुकदमों में जेल भेजा गया, अधिकारियों का दोगलापन उजागर.. जब सच बोलने की कीमत जेल है — मिशन नहीं, मखौल बन गया मिशन शक्ति। (शालिनी सिंह पटेल, प्रदेश उपाध्यक्ष जदयू — प्रभारी बुंदेलखंड)


बांदा। बांदा जिले में वही अधिकारी और नेता जो मंचों पर मिशन शक्ति का ढिंढोरा पीटते हैं, असल ज़िन्दगी में उन महिलाओं को फर्जी मुकदमों में फँसाकर जेल भेज रहे हैं — ऐसा आरोप जनता दल यूनाइटेड की प्रदेश उपाध्यक्ष और बुंदेलखंड प्रभारी शालिनी सिंह पटेल ने लगाया। 28–29 जुलाई को उनके साथ हुई घटना के हवाले से शालिनी ने कहा कि यह पूरी तरह साज़िश थी और मिशन शक्ति अब सिर्फ दिखावा बन कर रह गया है।

“मंचों पर भाषण देने वाले, सच बोलने वाली महिलाओं को जेल भेजते हैं।”

शालिनी ने कहा—“आप पोस्टर लगाइए, मंचों पर भाषण दीजिए, लेकिन जब हमारी बेटियाँ भ्रष्टाचार की पोल खोलने निकलती हैं, तो उन्हीं अधिकारियों के दबाव में उन्हें फर्जी मुकदमों में जेल भेज दिया जाता है। यह मिशन नहीं, यह धोखाधड़ी है। जनता तुम्हारा काला चेहरा पहचान चुकी है।”

“दो महिलाओं से इतना डर कि चार सीओ और पूरी फोर्स लगा दी।”

उन्होंने आगे कहा—“हमें उस समय तुम पर इतनी हंसी आ रही थी कि दो महिलाओं को कोर्ट में पेश करने के लिए चार सीओ लगाए गए, पूरे जिले की फोर्स तैनात की गई। इतना डरते हो रे! उसी पल एहसास हो गया कि यह है महिलाओं की असली ताकत।”

“वर्दी के पीछे छिपे नरभक्षी ही भ्रष्टाचार की ढाल बने बैठे हैं।”

शालिनी ने तीखे शब्दों में कहा—“बांदा के वही अधिकारी जो मंचों से मिशन शक्ति की बातें करते हैं, वही वर्दी के भेष में छिपे नरभक्षी हैं। जब सच्चाई सामने आने लगती है, तो फर्जी मुकदमे बनाकर महिलाओं को जेल भेजते हैं। अरे वर्दी वाले, जब तुम आगे बढ़ने दोगे तभी महिलाएँ आगे बढ़ेंगी। अब महिलाओं को तुम्हारे भाड़े के भाषण की जरूरत नहीं — हम खुद अपनी लड़ाई लड़ेंगे।”

बुंदेलखंड की वीरांगनाएँ — 1857 से लेकर आज तक सशक्त विरोध

शालिनी ने आगे कहा—“हमारे बुंदेलखंड की वीरांगनाओं ने 1857 की लड़ाई में भी अंग्रेजों को खदेड़ा था। अगर उन दिनों हमने गोरे अंग्रेजों को भगा दिया था, तो आज 21वीं सदी में वर्दी का चोला पहने हुए उन काले कृत्यों को करने वालों को भी हम हर गली-हर चौराहे-हर गांव जाकर उनकी सच्चाई बताएँगे और बेनकाब करेंगे। तुम वर्दी पहनकर खुद को क्या समझने लगे हो? कालिंजर के किले के इतिहास और हमारे रानियों की गाथा पढ़ लो — फिर भी हिम्मत हो तो आकर टकराओ।”

उन्होंने ज़ोर दिया—“महिला वह शक्ति है कि दुनिया का कोई भी तानाशाह या अत्याचारी (यहाँ तक कि हिटलर जैसा दिखने वाला भी) हमारी हिम्मत और संकल्प को नहीं तोड़ सकता। तुम जितनी भी परेशानियाँ खड़ी करोगे, हम पराजित नहीं होंगे — हर बार चार गुनी ऊर्जा के साथ तुम्हें चुनौती देंगे।”

“भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाओ — चुप्पी ही अन्याय को शक्ति देती है।”

स्थानीय महिलाओं ने बताया कि जब वे प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ धरना देने या विधानसभा तक अपनी बात पहुंचाने जाती हैं, तो योजनाबद्ध तरीके से उन पर मुकदमे ठोक दिए जाते हैं। इन घटनाओं ने महिलाओं के जीवन को भयंकर रूप से प्रभावित किया है और मिशन शक्ति जैसी अभियानों की साख पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

“हम न डरेंगी, न झुकेंगी — अब जनता तुम्हारा चेहरा पहचान चुकी है।”

शालिनी ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा—“हम बुंदेलखंड की महिलाएँ डरेंगी नहीं, झुकेंगी नहीं। हर फर्जी साज़िश का कानूनी और सार्वजनिक जवाब देंगे। अब जनता समझ चुकी है कि मिशन शक्ति के नाम पर कैसे महिलाओं को कुचला जा रहा है। हम हर जगह जाकर सच्चाई बताएँगे और सिस्टम की नाकामी का पर्दाफाश करेंगे।


संवाददाता: धर्मेंद्र ठाकुर की रिपोर्ट....

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